श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  1.19.65 
नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च।
जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नम:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
गौ-ब्राह्मण-हितकारी ब्रह्मण्यदेव भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार है। जगत-हितकारी श्री गोविंद को बार-बार नमस्कार है। 65॥
 
Salutations to the cow-Brahmin-beneficial Brahmanyadeva Lord Krishna. Salutations again and again to the world-benefactor Shri Govind. 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)