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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान्का सुदर्शनचक्रको भेजना
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श्लोक 61
श्लोक
1.19.61
तदेष तोयमध्ये तु समाक्रान्तो महीधरै:।
तिष्ठत्वब्दसहस्रान्तं प्राणान्हास्यति दुर्मति:॥ ६१॥
अनुवाद
अतः यदि यह पर्वतरूपी प्राणी हजारों वर्ष तक जल में रहे, तो यह दुष्ट स्वयं ही अपने प्राण त्याग देगा। 61.
Therefore, if this mountain-laden creature remains in water for thousands of years, then this wicked person will give up his life on his own. 61.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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