श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  1.19.54 
बहुशो वारितोऽस्माभिरयं पापस्तथाप्यरे:।
स्तुतिं करोति दुष्टानां वध एवोपकारक:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हमने उसे बहुत रोका, परन्तु वह दुष्ट शत्रु की स्तुति करता रहा। अच्छा, दुष्टों को मारना ही हितकर है ॥54॥
 
We tried to stop him a lot, but he kept on praising the evil enemy. Well, it is beneficial to kill the evil ones. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)