श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.19.42 
तदेतदवगम्याहमसारं सारमुत्तमम्।
निशामय महाभाग प्रणिपत्य ब्रवीमि ते॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे महापुरुष! इस प्रकार इन सबको व्यर्थ जानकर अब मैं आपको नमस्कार करता हूँ और उत्तम तत्त्व कहता हूँ; कृपया उसे सुनिए ॥42॥
 
O great man, having thus considered all these as worthless, I am now saluting you and telling you the best essence; please listen to it. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)