श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.19.29 
हिरण्यकशिपुरुवाच
मित्रेषु वर्तेत कथमरिवर्गेषु भूपति:।
प्रह्लाद त्रिषु लोकेषु मध्यस्थेषु कथं चरेत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा - प्रह्लाद! राजा को अपने मित्रों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? और शत्रुओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? तथा तीनों लोकों में (जो दोनों पक्षों का भला चाहते हैं) मध्यस्थों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?॥ 29॥
 
Hiranyakashipu said - Prahlada! [Tell me] how should a king behave with his friends? And how should he behave with his enemies? And how should he behave with those mediators (who wish well for both sides) in the three worlds?॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)