Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.17.81: यदि ऐसा प्रतीत हो कि अन्य सब प्राणी सुखी हैं और मैं शक्तिहीन हूँ, तब भी मनुष्य को सुखी रहना चाहिए, क्योंकि द्वेष का परिणाम सदैव दुःख ही होता है ॥81॥ | vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि ऐसा प्रतीत हो कि अन्य सब प्राणी सुखी हैं और मैं शक्तिहीन हूँ, तब भी मनुष्य को सुखी रहना चाहिए, क्योंकि द्वेष का परिणाम सदैव दुःख ही होता है ॥81॥
If it appears that all the other beings are happy and I am powerless, then too one should remain happy, because the result of hatred is always sorrow. ॥ 81॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥