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vishnu 1.17.78: उनका स्मरण करने में क्या परिश्रम है? और स्मरण मात्र से ही वे अत्यंत शुभ फल प्रदान करते हैं और जो लोग दिन-रात उनका स्मरण करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं ॥ 78॥   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  1.17.78 
प्रयास: स्मरणे कोऽस्य स्मृतो यच्छति शोभनम्।
पापक्षयश्च भवति स्मरतां तमहर्निशम्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
उनका स्मरण करने में क्या परिश्रम है? और स्मरण मात्र से ही वे अत्यंत शुभ फल प्रदान करते हैं और जो लोग दिन-रात उनका स्मरण करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं ॥ 78॥
 
What effort is there in remembering Him? And by mere remembrance He bestows very auspicious results and the sins of those who remember Him day and night are destroyed. ॥ 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)