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vishnu 1.17.57: और हे दैत्यराज! फिर यह जीवात्मा मृत्यु के मुख में जाता है, यह तुम और मैं प्रत्यक्ष देखते हो॥57॥   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.17.57 
ततश्च मृत्युमभ्येति जन्तुर्दैत्येश्वरात्मजा:।
प्रत्यक्षं दृश्यते चैतदस्माकं भवतां तथा॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
और हे दैत्यराज! फिर यह जीवात्मा मृत्यु के मुख में जाता है, यह तुम और मैं प्रत्यक्ष देखते हो॥57॥
 
And, O prince of demons! Then this soul goes into the mouth of death, this is seen by you and I directly. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)