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vishnu 1.17.50: हे राजन! हम आपके पुत्र को ऐसी शिक्षा देंगे कि वह विपक्षियों के नाश का कारण बनेगा और आपके प्रति अत्यंत विनम्र हो जाएगा ॥50॥   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  1.17.50 
तथातथैनं बालं ते शासितारो वयं नृप।
यथा विपक्षनाशाय विनीतस्ते भविष्यति॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हम आपके पुत्र को ऐसी शिक्षा देंगे कि वह विपक्षियों के नाश का कारण बनेगा और आपके प्रति अत्यंत विनम्र हो जाएगा ॥50॥
 
O King, we will educate your son in such a way that he will become the cause of destruction of the opposition and will become very humble towards you. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)