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vishnu 1.17.48: श्री पराशरजी बोले - तत्पश्चात शुक्रजी के पुत्र महावाक्यज्ञ महात्मा (शण्डामार्क आदि) तथा पुरोहितगण दैत्यराज की स्तुति करते हुए गरिमापूर्ण ढंग से बोले ॥48॥   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.17.48 
श्रीपराशर उवाच
अथ दैत्येश्वरं प्रोचुर्भार्गवस्यात्मजा द्विजा:।
पुरोहिता महात्मान: साम्ना संस्तूय वाग्मिन:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - तत्पश्चात शुक्रजी के पुत्र महावाक्यज्ञ महात्मा (शण्डामार्क आदि) तथा पुरोहितगण दैत्यराज की स्तुति करते हुए गरिमापूर्ण ढंग से बोले ॥48॥
 
Shri Parasharji said - Thereafter, the great eloquent Mahatma (Shandamark etc.) son of Shukraji and the priests spoke in a dignified manner praising the demon king. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)