Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.17.39: परंतु श्रीकृष्णचन्द्र में मन लगाये रहने और भगवान् के स्मरण के आनंद में मग्न रहने के कारण उन महान् सर्पों द्वारा डस लिये जाने पर भी उसे अपने शरीर की याद नहीं रही ॥39॥ | vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स त्वासक्तमति: कृष्णे दश्यमानो महोरगै:।
न विवेदात्मनो गात्रं तत्स्मृत्याह्लादसुस्थित:॥ ३९॥
अनुवाद
परंतु श्रीकृष्णचन्द्र में मन लगाये रहने और भगवान् के स्मरण के आनंद में मग्न रहने के कारण उन महान् सर्पों द्वारा डस लिये जाने पर भी उसे अपने शरीर की याद नहीं रही ॥39॥
But due to his mind being engrossed in Shri Krishna Chandra and being immersed in the ecstasy of remembering God, he did not remember his body even after being bitten by those great snakes. 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥