Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
vishnu 1.17.36: प्रह्लाद बोले, 'हे प्रिये! जो जन्म, जरा और मृत्यु के समस्त भयों को दूर करने वाला है, वह मेरे हृदय में विद्यमान है, तो मैं कैसे भयभीत हो सकता हूँ?'   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.17.36 
प्रह्लाद उवाच
भयं भयानामपहारिणि स्थिते
मनस्यनन्ते मम कुत्र तिष्ठति।
यस्मिन्स्मृते जन्मजरान्तकादि
भयानि सर्वाण्यपयान्ति तात॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद बोले, 'हे प्रिये! जो जन्म, जरा और मृत्यु के समस्त भयों को दूर करने वाला है, वह मेरे हृदय में विद्यमान है, तो मैं कैसे भयभीत हो सकता हूँ?'
 
Prahlada said, 'O dear! How can I be afraid when the One who removes all fears of birth, old age and death is present in my heart?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)