Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
vishnu 1.17.3: वह दैत्य इन्द्रपद का भोग करता था। वह महादैत्य स्वयं सूर्य, वायु, अग्नि, नेपच्यून और चन्द्रमा से बना था। 3॥   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.17.3 
इन्द्रत्वमकरोद्दैत्य: स चासीत्सविता स्वयम्।
वायुरग्निरपां नाथ: सोमश्चाभून्महासुर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह दैत्य इन्द्रपद का भोग करता था। वह महादैत्य स्वयं सूर्य, वायु, अग्नि, नेपच्यून और चन्द्रमा से बना था। 3॥
 
That demon used to enjoy Indrapad. That great demon himself was composed of Sun, Air, Fire, Neptune and Moon. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)