श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.15.39 
विनिन्द्येत्थं स धर्मज्ञ: स्वयमात्मानमात्मना।
तामप्सरसमासीनामिदं वचनमब्रवीत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उन धर्मज्ञ मुनि ने अपनी निन्दा करते हुए वहाँ बैठी हुई अप्सरा से कहा-॥39॥
 
Thus, that religious sage, while criticising himself, said to the Apsara sitting there -॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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