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vishnu 1.15.144: जिसे राक्षसराज द्वारा प्रज्वलित अग्नि उसके हृदय में भगवान वासुदेव के विराजमान होने के कारण सम्पूर्ण शरीर में फैलकर भी जला न सकी ॥144॥   |   vishnu अध्याय 1.15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  1.15.144 
दैत्येन्द्रदीपितो वह्नि: सर्वाङ्गोपचितो द्विज।
न ददाह च यं विप्र वासुदेवे हृदि स्थिते॥ १४४॥
 
 
अनुवाद
जिसे राक्षसराज द्वारा प्रज्वलित अग्नि उसके हृदय में भगवान वासुदेव के विराजमान होने के कारण सम्पूर्ण शरीर में फैलकर भी जला न सकी ॥144॥
 
Whom the fire lit by the demon king could not burn even after spreading throughout his body due to the presence of Lord Vasudev in his heart. 144॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)