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श्लोक 1.15.129  |
एवमुक्त्वा तु ते सर्वे चाक्षुषस्यान्तरे मनो:।
मारीचात्कश्यपाज्जाता अदित्या दक्षकन्यया॥ १२९॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार चाक्षुष-मन्वन्तर में उन सबने मरीचिपुत्र कश्यपजी के घर दक्षिणा कन्या अदिति के गर्भ से जन्म लेने का निश्चय किया ॥129॥ |
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| In this way, in Chakshusha-Manvantar, they all decided to take birth from the womb of Dakshina daughter Aditi in the house of Marichiputra Kashyapji. 129॥ |
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