श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  1.15.129 
एवमुक्त्वा तु ते सर्वे चाक्षुषस्यान्तरे मनो:।
मारीचात्कश्यपाज्जाता अदित्या दक्षकन्यया॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार चाक्षुष-मन्वन्तर में उन सबने मरीचिपुत्र कश्यपजी के घर दक्षिणा कन्या अदिति के गर्भ से जन्म लेने का निश्चय किया ॥129॥
 
In this way, in Chakshusha-Manvantar, they all decided to take birth from the womb of Dakshina daughter Aditi in the house of Marichiputra Kashyapji. 129॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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