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vishnu 1.15.118: बृहस्पतिजी की बहन वरस्त्री, जो ब्रह्मचारिणी और सिद्ध योगिनी थी तथा आसक्तिरहित होकर सम्पूर्ण पृथ्वी पर विचरण करती थी, आठवें वसु प्रभास की पत्नी हुई ॥118॥   |   vishnu अध्याय 1.15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.15.118 
बृहस्पतेस्तु भगिनी वरस्त्री ब्रह्मचारिणी।
योगसिद्धा जगत्कृत्स्नमसक्ता विचरत्युत।
प्रभासस्य तु सा भार्या वसूनामष्टमस्य तुु॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पतिजी की बहन वरस्त्री, जो ब्रह्मचारिणी और सिद्ध योगिनी थी तथा आसक्तिरहित होकर सम्पूर्ण पृथ्वी पर विचरण करती थी, आठवें वसु प्रभास की पत्नी हुई ॥118॥
 
Brihaspatiji's sister Varastri, who was a celibate and a Siddha Yogini and used to roam around the entire earth with no attachment, became the wife of the eighth Vasu Prabhasa. 118॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)