श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 107-108
 
 
श्लोक  1.15.107-108 
लम्बायाश्चैव घोषोऽथ नागवीथी तु यामिजा॥ १०७॥
पृथिवीविषयं सर्वमरुन्धत्यामजायत।
सङ्कल्पायास्तु सर्वात्मा जज्ञे सङ्कल्प एव हि॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
लम्बस से घोषा, यमी से नागवीति, अरुन्धती से समस्त पार्थिव प्राणी उत्पन्न हुए और संकल्प से सर्वव्यापी संकल्प उत्पन्न हुआ ॥107-108॥
 
From Lambas came Ghosha, from Yamis Nagavithi and from Arundhati all earthly beings came into being and from Sankalpa came the omnipresent resolution. 107-108॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd