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vishnu 1.14.45: तब भगवान हरि प्रसन्न हुए और जल के भीतर एक दिव्य रूप में प्रकट हुए, जो खिले हुए नीले कमल के समान चमक रहा था।   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.14.45 
तत: प्रसन्नो भगवांस्तेषामन्तर्जले हरि:।
ददौ दर्शनमुन्निद्रनीलोत्पलदलच्छवि:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान हरि प्रसन्न हुए और जल के भीतर एक दिव्य रूप में प्रकट हुए, जो खिले हुए नीले कमल के समान चमक रहा था।
 
Then Lord Hari became pleased and appeared to him within the water in a divine form, radiant like a blooming blue lotus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)