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अरजोऽशब्दममृतमप्लुतं यदसंवृतम्।
पूर्वापरे न वै यस्मिंस्तद्विष्णो: परमं पदम्॥ ४२॥
अनुवाद
जो रजोगुण से रहित, शब्दरहित, अमर, अचल और अनावृत है तथा जिसमें भूत और भविष्य की कोई गति नहीं है, वह भगवान विष्णु का परम धाम है ॥ 42॥
That which is devoid of the Rajoguna (light), soundless, immortal, motionless and uncovered, and in which there is no movement of past or future, is the ultimate abode of Lord Vishnu. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥