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यस्मिन्ननन्ते सकलं विश्वं यस्मात्तथोद्गतम्।
लयस्थानं च यस्तस्मै नम: प्रकृतिधर्मिणे॥ ३६॥
अनुवाद
उन प्रकृतिस्वरूप परमेश्वर को नमस्कार है, जिनमें सम्पूर्ण जगत् स्थित है, जिनसे इसकी उत्पत्ति हुई है और जो प्रलय का स्थान भी हैं ॥ 36॥
Salutations to that Supreme Being in the form of nature, in whom the entire universe is situated, from whom it originated and which is also the place of its dissolution. ॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥