Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.14.31: जो वायुरूप हैं और जो प्राण, प्राण और अपान आदि पाँच रूपों से शरीर में निवास करते हैं तथा जो दिन-रात कर्म करते रहते हैं और जिनकी योनि आकाश है, उन भगवान को नमस्कार है॥31॥ | vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पञ्चधावस्थितो देहे यश्चेष्टां कुरुतेऽनिशम्।
आकाशयोनिर्भगवांस्तस्मै वाय्वात्मने नम:॥ ३१ ॥
अनुवाद
जो वायुरूप हैं और जो प्राण, प्राण और अपान आदि पाँच रूपों से शरीर में निवास करते हैं तथा जो दिन-रात कर्म करते रहते हैं और जिनकी योनि आकाश है, उन भगवान को नमस्कार है॥31॥
Salutations to that God who is in the form of air and who resides in the body in the five forms of life, life, and apana etc. and who keeps on performing activities day and night and whose vagina is the sky. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥