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vishnu 1.14.27: जो तीक्ष्ण हैं, अपने तेज से आकाश को प्रकाशित करके अंधकार का नाश करते हैं, तथा जो गर्मी, सर्दी और जल के स्रोत हैं, उन सूर्य [नारायण] को नमस्कार है॥27॥   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.14.27 
यस्तमांस्यत्ति तीव्रात्मा प्रभाभिर्भासयन्नभ:।
धर्मशीताम्भसां योनिस्तस्मै सूर्यात्मने नम:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो तीक्ष्ण हैं, अपने तेज से आकाश को प्रकाशित करके अंधकार का नाश करते हैं, तथा जो गर्मी, सर्दी और जल के स्रोत हैं, उन सूर्य [नारायण] को नमस्कार है॥27॥
 
Salutations to the Sun [Narayan] who is sharp and devours the darkness by illuminating the sky with his brilliance and who is the source of heat, cold and water. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)