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vishnu 1.14.26: समस्त प्राणियों के जीवन रूप, सोमरूप भगवान को नमस्कार है, जिनके अमृतरूपी स्वरूप का देवता और पितर प्रतिदिन आनंद लेते हैं॥26॥   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.14.26 
भुज्यतेऽनुदिनं देवै: पितृभिश्च सुधात्मक:।
जीवभूत: समस्तस्य तस्मै सोमात्मने नम:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्राणियों के जीवन रूप, सोमरूप भगवान को नमस्कार है, जिनके अमृतरूपी स्वरूप का देवता और पितर प्रतिदिन आनंद लेते हैं॥26॥
 
Salutations to the Lord in the form of Soma, the life form of all living beings, whose nectar-like form the gods and ancestors enjoy daily. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)