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vishnu 1.14.23: प्रचेतस बोले: हम उन परमेश्वर को नमस्कार करते हैं जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं, जिनमें सम्पूर्ण वाक्यों का नित्य अस्तित्व है [अर्थात् जो सम्पूर्ण वाक्यों के एकमात्र विषय हैं] और जो जगत की उत्पत्ति और संहार के कारण हैं ॥23॥   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.14.23 
प्रचेतस ऊचु:
नता: स्म सर्ववचसां प्रतिष्ठा यत्र शाश्वती।
तमाद्यन्तमशेषस्य जगत: परमं प्रभुम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
प्रचेतस बोले: हम उन परमेश्वर को नमस्कार करते हैं जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं, जिनमें सम्पूर्ण वाक्यों का नित्य अस्तित्व है [अर्थात् जो सम्पूर्ण वाक्यों के एकमात्र विषय हैं] और जो जगत की उत्पत्ति और संहार के कारण हैं ॥23॥
 
The Prachetas said: We offer our obeisances to the Supreme Lord, the Leader of the entire universe, in whom all sentences have their eternal existence [i.e., who is the sole subject of all sentences] and who is the cause of the creation and destruction of the universe. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)