श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  1.13.58 
तस्माद्यदद्य स्तोत्रेण गुणनिर्वर्णनं त्विमौ।
करिष्येते करिष्यामि तदेवाहं समाहित:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
अतः ये लोग अपनी प्रशंसा में जो-जो गुण वर्णन करेंगे, मैं भी सावधानी से वैसा ही करूँगा ॥58॥
 
Therefore, whatever qualities these people will describe in their praise, I too will carefully do the same. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)