श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान‍्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  1.12.96 
श्रीपराशर उवाच
एवं पूर्वं जगन्नाथाद्देवदेवाज्जनार्दनात्।
वरं प्राप्य ध्रुव: स्थानमध्यास्ते स महामते॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - हे महामते ! इस प्रकार प्राचीन काल में जगत् के स्वामी भगवान जनार्दन से वर प्राप्त करके ध्रुव उस परम उत्तम स्थान में स्थित हो गये ॥96॥
 
Shri Parasharji said – O Mahamate! Thus, in ancient times, after receiving a boon from Lord Janardana, the world's master, Dhruv settled in that most excellent place. 96॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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