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श्लोक 1.12.95  |
ये च त्वां मानवा: प्रात: सायं च सुसमाहिता:।
कीर्त्तयिष्यन्ति तेषां च महत्पुण्यं भविष्यति॥ ९५॥ |
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| अनुवाद |
| और जो मनुष्य एकाग्र मन से सायं और प्रातःकाल आपका गुणगान करेंगे, उन्हें महान पुण्य की प्राप्ति होगी ॥95॥ |
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| And those who with a concentrated mind will sing your praises in the evening and morning will achieve great virtue. ॥ 95॥ |
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