| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान » श्लोक 91-92 |
|
| | | | श्लोक 1.12.91-92  | सूर्यात्सोमात्तथा भौमात्सोमपुत्राद्बृहस्पते:।
सितार्कतनयादीनां सर्वर्क्षाणां तथा ध्रुव॥ ९१॥
सप्तर्षीणामशेषाणां ये च वैमानिका: सुरा:।
सर्वेषामुपरि स्थानं तव दत्तं मया ध्रुव॥ ९२॥ | | | | | | अनुवाद | | हे ध्रुव! मैं तुम्हें वह ध्रुव (स्थिर) स्थान देता हूँ जो सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि, सम्पूर्ण नक्षत्रों, सप्तर्षियों और सम्पूर्ण उड़ने वाले देवताओं से भी ऊपर है। ॥91-92॥ | | | | O Dhruva, I give you that Dhruva (still) place which is above the Sun, Moon, Mars, Mercury, Jupiter, Venus and Saturn, all the constellations, the Saptarishis and all the flying gods. ॥91-92॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|