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श्लोक 1.12.72  |
सर्वात्मकोऽसि सर्वेश सर्वभूतस्थितो यत:।
कथयामि तत: किं ते सर्वं वेत्सि हृदि स्थितम्॥ ७२॥ |
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| अनुवाद |
| हे सर्वेश्वर! आप सर्वव्यापी हैं, क्योंकि आप सब प्राणियों में व्याप्त हैं; अतः मैं आपसे क्या कहूँ? आप तो हृदय में स्थित सब कुछ जानते हैं ॥ 72॥ |
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| O Lord of all things! You are omnipresent because you pervade all beings; so what should I say to you? You yourself know everything that is situated in the heart. ॥ 72॥ |
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