श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान‍्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  1.12.72 
सर्वात्मकोऽसि सर्वेश सर्वभूतस्थितो यत:।
कथयामि तत: किं ते सर्वं वेत्सि हृदि स्थितम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
हे सर्वेश्वर! आप सर्वव्यापी हैं, क्योंकि आप सब प्राणियों में व्याप्त हैं; अतः मैं आपसे क्या कहूँ? आप तो हृदय में स्थित सब कुछ जानते हैं ॥ 72॥
 
O Lord of all things! You are omnipresent because you pervade all beings; so what should I say to you? You yourself know everything that is situated in the heart. ॥ 72॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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