श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान‍्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.12.42 
श्रीभगवानुवाच
औत्तानपादे भद्रं ते तपसा परितोषित:।
वरदोऽहमनुप्राप्तो वरं वरय सुव्रत॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - हे उत्तानपादपुत्र ध्रुव! तुम्हारा कल्याण हो। हे सुव्रत, तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न होकर मैं तुम्हें वर देने के लिए प्रकट हुआ हूँ। तुम वर माँगों। 42॥
 
Shri Bhagwan said – O Dhruva, son of Uttanapada! May you be well. Pleased with your penance, I have appeared to grant you a boon, O Suvrata! You ask for a groom. 42॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas