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श्लोक 1.12.37  |
तदस्माकं प्रसीदेश हृदयाच्छल्यमुद्धर।
उत्तानपादतनयं तपस: सन्निवर्त्तय॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| अतः हे प्रभु, हम पर प्रसन्न होकर उत्तानपाद के पुत्र को तपस्या से मुक्त कीजिए और हमारे हृदय से काँटा निकाल दीजिए ॥37॥ |
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| Therefore, O Lord, please be pleased with us and relieve the son of Uttanapada from his penance and remove the thorn from our hearts. ॥ 37॥ |
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