| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान » श्लोक 23-24 |
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| | | | श्लोक 1.12.23-24  | वत्स वत्स सुघोराणि रक्षांस्येतानि भीषणे।
वनेऽभ्युद्यतशस्त्राणि समायान्त्यपगम्यताम्॥ २३॥
इत्युक्त्वा प्रययौ साथ रक्षांस्याविर्बभुस्तत:।
अभ्युद्यतोग्रशस्त्राणि ज्वालामालाकुलैर्मुखै:॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | फिर 'हे पुत्र! यहाँ से भाग जाओ! देखो, इस भयानक वन में कैसे भयंकर राक्षस हाथ में शस्त्र लिए चले आ रहे हैं' ऐसा कहकर वह चली गई और वहाँ बहुत से शस्त्रधारी राक्षस प्रकट हुए, जिनके मुखों से अग्नि की ज्वालाएँ निकल रही थीं॥23-24॥ | | | | Then, saying, 'O son, run away from here! See what fierce demons are coming in this terrifying forest with their weapons in their hands', she went away and there appeared many demons holding weapons, from whose mouths flames of fire were emanating.॥ 23-24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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