श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान‍्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.12.11 
नद्यो नदा: समुद्राश्च सङ्क्षोभं परमं ययु:।
तत्क्षोभादमरा: क्षोभं परं जग्मुर्महामुने॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! उस समय समस्त नदियाँ, सरिताएँ और समुद्र अत्यन्त व्याकुल हो उठे और उनकी व्याकुलता से देवताओं में भी महान् हलचल मच गई॥11॥
 
O great sage! At that time all the rivers, streams and oceans became very agitated and their agitatedness caused a great commotion even amongst the gods. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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