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vishnu 1.11.7: "हे लल्ला! तू किसी अन्य स्त्री का पुत्र है, मेरी कोख से उत्पन्न नहीं हुआ है, फिर भी तू इतनी बड़ी इच्छा में अपना समय क्यों नष्ट करता है? ॥7॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.11.7 
क्रियते किं वृथा वत्स महानेष मनोरथ:।
अन्यस्त्रीगर्भजातेन ह्यसम्भूय ममोदरे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"हे लल्ला! तू किसी अन्य स्त्री का पुत्र है, मेरी कोख से उत्पन्न नहीं हुआ है, फिर भी तू इतनी बड़ी इच्छा में अपना समय क्यों नष्ट करता है? ॥7॥
 
"Oh Lalla! Why do you waste your time on such a big desire even though you are the son of some other woman and not born from my womb? ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)