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vishnu 1.11.6: अपनी सहधर्मिणी के पुत्र की गोद में बैठने के लिए आतुर सुरुचि अपने पुत्र को गोद में बैठा देखकर इस प्रकार कहने लगी।   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.11.6 
सपत्नीतनयं दृष्ट्वा तमङ्कारोहणोत्सुकम्।
स्वपुत्रं च तथारूढं सुरुचिर्वाक्यमब्रवीत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अपनी सहधर्मिणी के पुत्र की गोद में बैठने के लिए आतुर सुरुचि अपने पुत्र को गोद में बैठा देखकर इस प्रकार कहने लगी।
 
Eager to sit on her co-wife's son's lap, seeing her own son sitting in her lap, Suruchi began to speak thus. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)