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vishnu 1.11.52: ऋषियों ने कहा - हे राजन्! भगवान विष्णु की पूजा में तत्पर मनुष्यों को किस प्रकार उनकी पूजा करनी चाहिए, कृपया हमसे ठीक-ठीक सुनिए॥52॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.11.52 
ऋषय ऊचु:
राजपुत्र यथा विष्णोराराधनपरैर्नरै:।
कार्यमाराधनं तन्नो यथावच्छ्रोतुमर्हसि॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने कहा - हे राजन्! भगवान विष्णु की पूजा में तत्पर मनुष्यों को किस प्रकार उनकी पूजा करनी चाहिए, कृपया हमसे ठीक-ठीक सुनिए॥52॥
 
The sages said – O Prince! Please listen to us exactly how people who are ready to worship Lord Vishnu should worship him. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)