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vishnu 1.11.5: परंतु राजा ने उस पुत्र का आदर नहीं किया जो प्रेमवश उसकी प्रिय सुरुचि की गोद में बैठने के लिए आतुर होकर उसके पास आया था ॥5॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.11.5 
प्रत्यक्षं भूपतिस्तस्या: सुरुच्या नाभ्यनन्दत।
प्रणयेनागतं पुत्रमुत्सङ्गारोहणोत्सुकम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
परंतु राजा ने उस पुत्र का आदर नहीं किया जो प्रेमवश उसकी प्रिय सुरुचि की गोद में बैठने के लिए आतुर होकर उसके पास आया था ॥5॥
 
But the king did not respect the son who came to his beloved Suruchi out of love, eager to be placed in her lap. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)