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vishnu 1.11.46: पुलस्त्यजी बोले: जो परम ब्रह्म, परम धाम और परब्रह्म के परम स्वरूप हैं, उन हरि की पूजा करके मनुष्य अत्यंत दुर्लभ मोक्षपद को प्राप्त कर सकता है ॥ 46॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.11.46 
पुलस्त्य उवाच
परं ब्रह्म परं धाम योऽसौ ब्रह्म तथा परम्।
तमाराध्य हरिं याति मुक्तिमप्यतिदुर्लभाम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
पुलस्त्यजी बोले: जो परम ब्रह्म, परम धाम और परब्रह्म के परम स्वरूप हैं, उन हरि की पूजा करके मनुष्य अत्यंत दुर्लभ मोक्षपद को प्राप्त कर सकता है ॥ 46॥
 
Pulastya said: By worshipping Hari, who is the Supreme Brahma, the Supreme Abode and the Supreme Form of the Supreme, a man can achieve the very rare state of salvation. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)