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vishnu 1.11.40: और हे अतुलित तेजस्वी! हम आपकी किस प्रकार सहायता कर सकते हैं, यह भी बताइए, क्योंकि हमें ऐसा प्रतीत होता है कि आप कुछ कहना चाहते हैं ॥40॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.11.40 
यच्च कार्यं तवास्माभि: साहाय्यममितद्युते।
तदुच्यतां विवक्षुस्त्वमस्माभिरुपलक्ष्यसे॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
और हे अतुलित तेजस्वी! हम आपकी किस प्रकार सहायता कर सकते हैं, यह भी बताइए, क्योंकि हमें ऐसा प्रतीत होता है कि आप कुछ कहना चाहते हैं ॥40॥
 
And O incomparably radiant one! Also tell us how we can help you, because it seems to us that you want to say something. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)