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vishnu 1.11.38: अहा! क्षत्रिय बल कितना प्रबल है, जिसके कारण बालक भी इतना निर्भय है कि अपनी सौतेली माता की बात भी टाल नहीं सकता। ॥38॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.11.38 
अहो क्षात्रं परं तेजो बालस्यापि यदक्षमा।
सपत्न्या मातुरुक्तं यद् हृदयान्नापसर्पति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अहा! क्षत्रिय बल कितना प्रबल है, जिसके कारण बालक भी इतना निर्भय है कि अपनी सौतेली माता की बात भी टाल नहीं सकता। ॥38॥
 
Oh! How strong is the Kshatriya power, due to which even a child is so fearless that he cannot ignore the words of his stepmother.' ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)