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vishnu 1.11.34: ऋषि बोले, "राजकुमार! तुम केवल चार या पाँच वर्ष के हो। मुझे तुम्हारी उदासीनता का कोई कारण नहीं दिखता।"   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.11.34 
ऋषय ऊचु:
चतु:पञ्चाब्दसम्भूतो बालस्त्वं नृपनन्दन।
निर्वेदकारणं किञ्चित्तव नाद्यापि वर्त्तते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले, "राजकुमार! तुम केवल चार या पाँच वर्ष के हो। मुझे तुम्हारी उदासीनता का कोई कारण नहीं दिखता।"
 
The sage said, "Prince! You are only four or five years old. I don't see any reason for your indifference."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)