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vishnu 1.11.33: ध्रुव बोले, "हे महात्माओं! कृपया मुझे सुनीति से उत्पन्न राजा उत्तानपाद का पुत्र मानें। मैं आत्मग्लानि के कारण आपके पास आया हूँ।"   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.11.33 
ध्रुव उवाच
उत्तानपादतनयं मां निबोधत सत्तमा:।
जातं सुनीत्यां निर्वेदाद्युष्माकं प्राप्तमन्तिकम्॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
ध्रुव बोले, "हे महात्माओं! कृपया मुझे सुनीति से उत्पन्न राजा उत्तानपाद का पुत्र मानें। मैं आत्मग्लानि के कारण आपके पास आया हूँ।"
 
Dhruva said, "O great souls! Please consider me the son of King Uttanapada, born of Suniti. I have come to you because of remorse for myself."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)