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vishnu 1.11.22: तथापि बेटा, तुम्हें दुःखी नहीं होना चाहिए, क्योंकि मनुष्य जो कुछ भी पाता है, वह अपने ही धन में मग्न रहता है ॥ 22॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.11.22 
तथापि दु:खं न भवान‍् कर्त्तुमर्हति पुत्रक।
यस्य यावत्स तेनैव स्वेन तुष्यति मानव:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तथापि बेटा, तुम्हें दुःखी नहीं होना चाहिए, क्योंकि मनुष्य जो कुछ भी पाता है, वह अपने ही धन में मग्न रहता है ॥ 22॥
 
However, son, you should not be sad, because whatever a person gets, he remains engrossed in his own wealth. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)