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श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.11.16 
सुनीतिरुवाच
सुरुचि: सत्यमाहेदं मन्दभाग्योऽसि पुत्रक।
न हि पुण्यवतां वत्स सपत्नैरेवमुच्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सुनीति बोली - बेटा! सुरुचि ने ठीक कहा है, तुम निश्चय ही अभागे हो। हे पुत्र! पुण्यात्माओं के विरोधी उनसे ऐसी बातें नहीं कह सकते।
 
Suniti said - Son! Suruchi has said the right thing, you are certainly unfortunate. Oh son! Opponents of the virtuous cannot say such things to them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)