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vishnu 1.11.15: जब उसका पुत्र रोते हुए ऐसा कहने लगा, तब दुःख से व्याकुल और उदास नेत्रों वाली दीर्घ निःश्वास के कारण व्याकुल सुनीति ने ऐसा कहा ॥15॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.11.15 
विनि:श्वस्येति कथिते तस्मिन्पुत्रेण दुर्मना:।
श्वासक्षामेक्षणा दीना सुनीतिर्वाक्यमब्रवीत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जब उसका पुत्र रोते हुए ऐसा कहने लगा, तब दुःख से व्याकुल और उदास नेत्रों वाली दीर्घ निःश्वास के कारण व्याकुल सुनीति ने ऐसा कहा ॥15॥
 
When her son said this sobbingly, the distressed Suniti, distraught with grief and with gloomy eyes said this due to her long sigh. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)