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vishnu 1.11.10: तू मेरे पुत्र के समान होने की इतनी बड़ी इच्छा क्यों व्यर्थ ही कर रहा है? क्या तू नहीं जानता कि तू सुनीति से उत्पन्न हुआ है?॥10॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.11.10 
उच्चैर्मनोरथस्तेऽयं मत्पुत्रस्येव किं वृथा।
सुनीत्यामात्मनो जन्म किं त्वया नावगम्यते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तू मेरे पुत्र के समान होने की इतनी बड़ी इच्छा क्यों व्यर्थ ही कर रहा है? क्या तू नहीं जानता कि तू सुनीति से उत्पन्न हुआ है?॥10॥
 
Why do you have such a lofty desire to be like my son in vain? Don't you know that you were born from Suniti?''॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)