vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
वैष्णव भजन
»
आसल कथा बोल्ते
आसल कथा बोल्ते
श्रील भक्तिविनोद ठाकुर
भाषा:
हिन्दी
|
English
|
தமிழ்
|
ಕನ್ನಡ
|
മലയാളം
|
తెలుగు
|
ગુજરાતી
|
বাংলা
|
ଓଡ଼ିଆ
|
ਗੁਰਮੁਖੀ
|
आसल कथा बोल्ते कि
तोमार केंथा – धरा, कपनि – आँटा – सब फाँकि॥1॥
धर्मपत्नी त्यजि’ घरे, परनारी – सङ्ग करे,
अर्थ – लोभे द्वारे द्वारे फिरे, राखले कि बाकी॥2॥
तुमि गुरु बोल्छो वटे, साधु – गुरु निष्कपटे,
कृष्णनाम देनो कर्ण – पुटे, से कि एमन होय मेकि?॥3॥
जेबा अन्य शिक्षा देय, ता’के कि ‘गुरु’ बोल्ते हय?
दुधेर फल तो’ घोले नय, भेवे ‘चित्ते देख देखि॥4॥
शम – दम – तितिक्षा – बले, उपरति, श्रद्धा ह’ले,
तबे भेक चाँद – बाउल, बोले, एन्चडे पेके हबे कि?॥5॥
शब्दार्थ
अर्थ / अनुवाद केवल अंग्रेजी में उपलब्ध है।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×