श्रीमती कुन्ती देवी स्तुति कर रही हैं:
"O Krishna, I offer my respectful obeisances unto You, because You are the original Personality of Godhead, existing beyond the material cosmos, untouched by the qualities of material nature. You are invisible to the eyes of all living beings, yet You exist both within and without everything."
कुन्ती महारानी भगवान की आराधना कर रही हैं कि आप जो हैं, साक्षात परम पुरुष भगवान—'अन्तर्बहिरवस्थितम्'—भीतर में भी विराजमान हैं और बाहर भी विद्यमान हैं।
भगवान तो सर्वत्र हैं:
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति ।
(श्रीमद् भगवद्गीता 18.61)
भगवान श्रीमद् भगवद्गीता में कहते हैं कि भगवान सबके हृदय में अंतर्यामी रूप से बैठे हैं—पशु, पक्षी, कीट, पतंग, मनुष्य, देवता—सबके भीतर विद्यमान हैं।
अण्डान्तरस्थपरमाणुचयान्तरस्थं
गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ।
(ब्रह्मसंहिता 5.35)
भगवान इस संपूर्ण ब्रह्मांड के भीतर भी हैं, और यह ब्रह्मांड जिन सूक्ष्मातिसूक्ष्म परमाणुओं से बना है, उस प्रत्येक परमाणु के भीतर भी उपस्थित हैं!
और बाहर भी सर्वत्र हैं: पंचभूत—भूमि, जल, अग्नि (तेज), वायु और आकाश—सर्वत्र भगवान की ही शक्ति व्याप्त है। परंतु भगवान सबके भीतर और बाहर प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहते हुए भी साधारण मनुष्य को उनका दर्शन नहीं होता।
शास्त्र में इसका सुंदर उदाहरण दिया गया है:
मायाजवनिकाच्छन्नमज्ञाधोक्षजमव्ययम् ।
न लक्ष्यसे मूढदृशा नटो नाट्यधरो यथा ॥
(श्रीमद्भागवतम् 1.8.19)
जैसे कोई व्यक्ति नाट्यशाला (रंगमंच) में दूसरा वेश धारण करके अभिनय कर रहा हो; सामने दर्शक-दीर्घा में बैठा उसका सगा भाई या परिजन उसे देख रहा है, फिर भी वेशभूषा बदल जाने के कारण वह उसे पहचान नहीं पाता। उसी प्रकार भगवान सबके भीतर और बाहर सर्वत्र उपस्थित हैं, परंतु जो जीव माया के पर्दे से ढके हुए हैं, वे उन्हें नहीं देख पाते।
प्रकृति के तीनों गुणों से अतीत होने पर ही भगवान का यथार्थ दर्शन होता है। और मनुष्य तीनों गुणों से अतीत कब होता है? जब वह भगवान के श्रीचरणों में शरणागत हो जाता है:
दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया ।
मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते ॥
(श्रीमद् भगवद्गीता 7.14)
माता जी: तीनों गुणों से रहित होने पर भगवान दिखाई देते हैं।
श्रील प्रभुपाद: माता जी सब जानती हैं! Very good. आप तो साक्षात लक्ष्मी हैं; आपके लिए ही तो सब कुछ है। स्त्री के भाग्य में धन होता है, और पुरुष के भाग्य में संतान होती है। यह आपकी छोटी सुपुत्री है? अच्छा, सबकी शादी हो गई? अब बच्चों के विवाह आदि सांसारिक कर्तव्यों से निवृत्त होकर आप लोग वृन्दावन चलिए!
माता जी / परिवार: हाँ, बस आपका आशीर्वाद चाहिए। सब कुछ भगवान ने दिया है।
श्रील प्रभुपाद: हाँ, भगवान की कृपा से सब तरह से परिपूर्ण हैं। आप लोग यदि चाहें, तो इस हरे कृष्ण आंदोलन में बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं।
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरोजनः ।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥
(श्रीमद् भगवद्गीता 3.21)
भगवान की कृपा से आप लोग समाज में प्रतिष्ठित और श्रेष्ठ हैं। कम से कम आजकल के युग में तो लोग धनी और उद्योगपति को ही श्रेष्ठ मानते हैं। तो आप जैसे श्रेष्ठ लोग यदि आदर्श कृष्णभावना का आचरण करेंगे, तो साधारण जनता स्वतः आपका अनुकरण करेगी।
जैसे आपकी मिल और फैक्ट्रियाँ हैं; आप लोग यदि अपनी फैक्ट्री में कृष्णभावनामृत को लागू करें... यह हमारे कृष्णभावनामृत आंदोलन का एक बड़ा विचार है (That is in my idea, though I have not been able to introduce it everywhere)। फैक्ट्रियों को एकदम बंद तो नहीं किया जा सकता, यद्यपि शास्त्र में इसे 'उग्र कर्म' कहा गया है।
'उग्र कर्म' का अर्थ होता है अत्यंत तीव्र, कठोर और अशांत कर्म। कर्म तो अवश्य करना चाहिए, बिना कर्म किए तो देह का निर्वाह भी नहीं हो सकता:
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः ।
(श्रीमद् भगवद्गीता 3.8)
यह भौतिक जगत है, यहाँ पेट भरने के लिए परिश्रम तो करना ही पड़ेगा। परंतु एक व्यक्ति अल्प परिश्रम में साधारण जीविका और ईश्वर-भजन से संतुष्ट रहता है, और दूसरा व्यक्ति बहुत विशाल और gorgeous जीवन जीने के लिए दिन-रात उग्र कर्म में लगा रहता है।
अन्यथा सात्विक और शांतिपूर्ण जीवन क्या है? सादा जीवन और उच्च विचार—गौ-रक्षा, कृषि और भगवद्-भजन।
परंतु यदि आपकी फैक्ट्रियाँ चल रही हैं, तो आप उन फैक्ट्रियों के कार्य को ही भगवद्-सेवा बना दीजिए! वहाँ जो साधारण श्रमिक काम करते हैं, उनके लिए प्रतिदिन कीर्तन, भागवत-श्रवण और महाप्रसाद की व्यवस्था कर दीजिए। जब श्रमिक देखेंगे कि मालिक स्वयं भगवान का अनन्य भक्त है और उनके साथ बैठकर कीर्तन करता है, तो वे भी भक्ति में लग जाएंगे।
यदि आप अपनी फैक्ट्री में भगवद्-भजन का यह सुंदर आदर्श प्रस्तुत करेंगे, तो यह पूरे समाज के लिए एक महान उदाहरण बन जाएगा। इसका ठीक-ठीक व्यावहारिक तरीका हम आपको सिखा देंगे।
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