"Explain," said, "O Sanjaya, after assembling in the place of Kurukshetra, what did my sons and the sons of Pandu do, being desirous to fight?"
महाराज धृतराष्ट्र ने पूछा। संजय—संजय उनके सेक्रेटरी हैं, उनसे पूछा कि, "हमारे लड़के, मामकाः, और हमारे छोटे भाई के, पांडव लोग, ये सब लड़ाई करने के लिए तो धर्मक्षेत्र में गए, फिर क्या किया?" यह पूछ रहे हैं।
तो बड़ा सरल है। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र दिल्ली के पास ही है, अभी तक कुरुक्षेत्र मौजूद है और वह धर्मक्षेत्र है, वहाँ लोग धर्म-जागरण करते हैं। वेद में भी लिखा है कि कुरुक्षेत्र में जाकर के धर्म-जागरण करो। फिर उसमें इधर-उधर बात करने की क्या ज़रूरत है? Interpretation... what is the Hindi of interpretation? Comment... interpretation में अर्थवाद—एक अर्थ, दूसरा अर्थ, meaning, अर्थवाद। और ये सब मूर्ख लोग कहते हैं, "कुरुक्षेत्र का अर्थ है शरीर।" क्यों कुरुक्षेत्र का अर्थ शरीर? कौन डिक्शनरी में है कोई अर्थ 'शरीर'? और यह सब चलता है। उल्टा-सीधा बता के दूसरे को भड़काते हैं और खुद भी misled होते हैं। यह नहीं करना चाहिए।
व्यासदेव ने यह श्रीमद् भगवद्गीता को लिखा है, वह अर्थवाद करने के लिए लिखा है क्या? समझने के लिए लिखा है और सरल है। Interpretation, अर्थवाद, तभी ज़रूरत है जब वह समझ में न आए। जब बिल्कुल सरल समझ में आता है—कुरुक्षेत्र जगह है और शास्त्र के अनुसार धर्मक्षेत्र है।
हमारे आजकल गाँव में कोई किसी से परस्पर झगड़ा हुआ तो मंदिर में जाते हैं। क्यों? अभी तक भी है, पहले तो बहुत था, मंदिर में कोई झूठ नहीं बोलता। फैसला हो। इसी प्रकार धर्मक्षेत्र में लड़ाई किया कि यदि उनका झगड़ा फैसला... इसीलिए धृतराष्ट्र पूछ रहा है, "फिर क्या?" लड़ाई करने को गए, लड़ाई किया, सब कोई समझेगा। क्यों उत्सुक है कि उधर जाकर के फिर क्या किया? मतलब है कि धर्मक्षेत्र में जाकर के उनका मन बदला कि नहीं। एक आदमी झूठ बोलता है, अगर भगवान के सामने उसको कहा जाए, "अब तू बोल", तो पहले डरता था, "भगवान के सामने कैसे झूठ बोलें, सच्ची बात बोलें।" इसी प्रकार ये धृतराष्ट्र, वह जानते थे सच्ची बात है कि पांडव लोग का राज्य है, उनके पिता का राज्य है। "हम लोग पॉलिसी करके उनको बहुत तकलीफ दिया और फिर अब लड़ाई होने वाला है।" तो धर्मक्षेत्र में जाकर के उन्होंने फैसला तो नहीं किया? वह नहीं चाहते थे फैसला, वह चाहते थे लड़ाई हो। क्योंकि वह कौरव लोग भाई हैं और वे पाँच हैं। वह समझता था कि हमारा ज़ोर ज़्यादा है, हमारा सिपाही ज़्यादा है, तो लड़ाई हो जाए तो पाँच भाई खत्म हो जाएँगे, फिर हमारे लड़के लोग निष्कंटक से राज करेंगे। उनके पूछने का मतलब वही है।
जब आप लोग गीता पढ़ेंगे, उसमें अर्थवाद नहीं लगाएंगे—"मनमाना जो मैं सोच रहा हूँ, इसका अर्थ यह है।" नहीं! अर्थ जो बताया है, वही अर्थ है। इस प्रकार अगर पढ़ेंगे, तो गीता पढ़ने से आपको फायदा होगा, और nonsense इधर-उधर करने से कुछ फायदा नहीं है।
Thank you.
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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